राघव चड्ढा समेत 7 AAP राज्यसभा सांसदों ने थामा BJP का हाथ

के द्वारा प्रकाशित किया गया Krishna Prasanth    पर 25 अप्रैल 2026    टिप्पणि (0)

राघव चड्ढा समेत 7 AAP राज्यसभा सांसदों ने थामा BJP का हाथ

भारतीय राजनीति में शुक्रवार, 24 अप्रैल 2026 को एक ऐसा भूचाल आया जिसने आम आदमी पार्टी (AAP) की बुनियाद हिला दी। पार्टी के सबसे चर्चित चेहरों में से एक, राघव चड्ढा ने छह अन्य राज्यसभा सदस्यों के साथ मिलकर भारतीय जनता पार्टी (BJP)

यह पूरी घटना दिल्ली

सिद्धांतों की बात या राजनीतिक मजबूरी?

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राघव चड्ढा काफी भावुक नजर आए। उन्होंने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा, "मैंने इस पार्टी को अपने खून-पसीने से सींचा है और अपनी जवानी के 15 साल इसे दिए। लेकिन आज यह पार्टी अपने सिद्धांतों, मूल्यों और बुनियादी नैतिक मानकों से पूरी तरह भटक चुकी है।" मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो चड्ढा ने खुद को 'गलत पार्टी में सही व्यक्ति' करार दिया।

इस बड़े बदलाव में चड्ढा के साथ संदीप पाठक अशोक मित्तल स्वाति मालीवाल

संविधान का दांव और 'टू-थर्ड' का गणित

इस पूरे खेल में सबसे अहम पहलू संवैधानिक प्रावधानों का इस्तेमाल है। AAP के पास राज्यसभा में कुल 10 सदस्य थे। इनमें से 7 सदस्यों (दो-तिहाई से अधिक) ने एक साथ विलय के दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए और उन्हें राज्यसभा के सभापति को सौंप दिया।

जब दो-तिहाई सदस्य एक साथ किसी दूसरी पार्टी में शामिल होते हैं, तो इसे संवैधानिक रूप से 'विलय' (Merger) माना जाता है, जिससे दल-बदल विरोधी कानून के तहत उनकी सदस्यता पर खतरा नहीं मंडराता। (यही वजह है कि इतने बड़े पैमाने पर एक साथ इस्तीफा या दलबदल किया गया)।

मुख्य घटनाक्रमों पर एक नजर:

  • 2 अप्रैल 2026: AAP के भीतर राजनीतिक तनाव की शुरुआत।
  • 24 अप्रैल 2026 (सुबह): राज्यसभा सभापति को विलय पत्र सौंपे गए।
  • 24 अप्रैल 2026 (दोपहर): बीजेपी मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस और आधिकारिक घोषणा।
  • 24 अप्रैल 2026 (शाम): बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन

'ऑपरेशन लोटस' और केजरीवाल को बड़ा झटका

जैसे ही यह खबर फैली, AAP खेमे में खलबली मच गई। पार्टी ने इस पूरे घटनाक्रम को बीजेपी का 'ऑपरेशन लोटस' करार दिया है। दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल

हैरानी की बात यह है कि इस दलबदल से ठीक पहले AAP ने राघव चड्ढा को राज्यसभा में पार्टी के उप-नेता के पद से हटा दिया था। लेकिन ट्विस्ट तो तब आया जब इस हटाने की प्रक्रिया के तुरंत बाद केंद्र सरकार ने उन्हें Z-श्रेणी की सुरक्षा प्रदान कर दी। यह संयोग या कोई सोची-समझी रणनीति थी, इस पर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हैं।

रिश्तों का ताना-बाना और प्रभाव

सूत्रों की मानें तो अशोक मित्तल और विक्रमजीत साहनी जैसे नेताओं का अरविंद केजरीवाल से परिचय ही राघव चड्ढा ने करवाया था जब वे पंजाब में पार्टी के लिए काम कर रहे थे। चड्ढा और मित्तल के बीच गहरे संबंध रहे हैं, जिसने इस सामूहिक दलबदल को आसान बना दिया।

इस कदम का असर अब आने वाले दिनों में राज्यसभा की वोटिंग और रणनीतियों पर पड़ेगा। बीजेपी के लिए यह केवल संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि AAP के सबसे मजबूत गढ़ में सेंध लगाना है। वहीं, AAP के लिए सवाल यह है कि क्या उनके संस्थापक सिद्धांतों में वाकई कोई कमी आई है या यह महज सत्ता का खेल है?

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

राघव चड्ढा ने AAP छोड़ने का मुख्य कारण क्या बताया?

राघव चड्ढा ने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी अपने मूल सिद्धांतों, नैतिक मूल्यों और आदर्शों से पूरी तरह भटक चुकी है। उन्होंने कहा कि उन्होंने पार्टी को 15 साल दिए, लेकिन अब वे पार्टी की विचारधारा से सहमत नहीं हैं।

क्या ये सांसद दल-बदल कानून के तहत अयोग्य घोषित होंगे?

नहीं, क्योंकि उन्होंने 'विलय' (Merger) के प्रावधान का उपयोग किया है। चूंकि राज्यसभा के कुल 10 सदस्यों में से 7 (जो कि दो-तिहाई से अधिक हैं) एक साथ बीजेपी में शामिल हुए हैं, इसलिए वे संवैधानिक नियमों के तहत अपनी सदस्यता बरकरार रखेंगे।

इस घटनाक्रम का अरविंद केजरीवाल पर क्या असर पड़ेगा?

यह केजरीवाल के लिए एक बड़ा राजनीतिक और रणनीतिक झटका है। पार्टी के एक भरोसेमंद और युवा चेहरे का जाना न केवल राज्यसभा में उनकी ताकत कम करेगा, बल्कि पार्टी की आंतरिक एकजुटता पर भी सवाल खड़े करेगा।

दलबदल की प्रक्रिया कब शुरू हुई और कब पूरी हुई?

पार्टी के भीतर तनाव 2 अप्रैल 2026 को शुरू हुआ था। लगभग 22 दिनों की खींचतान के बाद 24 अप्रैल 2026 को सांसदों ने राज्यसभा सभापति को पत्र सौंपे और बीजेपी मुख्यालय में शामिल हुए।